BSEB Class 12 Biology Chapter 2 Strategy 2009-2026 PYQ Analysis

बीएसईबी (BSEB) कक्षा 12 जीव विज्ञान: 'पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन' अध्याय का विस्तृत परीक्षा रणनीति एवं विगत वर्षों के प्रश्नों (PYQ) का विश्लेषण

वर्ष 2009 से 2026 तक के 82 पिछले वर्षों के प्रश्नों का संपूर्ण एवं विस्तृत विश्लेषण, परीक्षकों की प्राथमिकताएँ और 2027 की बोर्ड परीक्षा हेतु सर्वाधिक संभावित प्रश्न।

📊
82
कुल विश्लेषित PYQs
🎯
57
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
📝
17
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
🏆
8
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
Step 1

ट्रेंड विश्लेषण (Trend Analysis)

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (Bihar School Examination Board - BSEB) द्वारा आयोजित कक्षा 12 की जीव विज्ञान (Biology) परीक्षा के अंतर्गत 'पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन' (Sexual Reproduction in Flowering Plants) एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय (Chapter) है। वर्ष 2009 से 2026 तक के विगत वर्षों के प्रश्नों (Previous Year Questions - PYQs) के व्यापक डेटा का सूक्ष्म अवलोकन करने पर परीक्षा के स्वरूप, परीक्षकों की प्राथमिकता (Examiner's priority), और प्रश्नों की पुनरावृत्ति (Repetition of questions) के स्पष्ट प्रतिमान (Patterns) उभर कर सामने आते हैं। इस डेटासेट में कुल 82 प्रश्न शामिल हैं, जिनमें 57 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions), 17 लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions), और 8 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions) हैं।

डेटा के गहन विश्लेषण (Deep analysis) से निम्नलिखित प्रमुख रणनीतिक निष्कर्ष (Strategic conclusions) प्राप्त होते हैं:

  • भ्रूणपोष (Endosperm) की सर्वोच्च प्राथमिकता: पूरे डेटासेट में भ्रूणपोष (Endosperm) की संरचना, इसकी सूत्रगुणता (Ploidy level), और इसके निर्माण की प्रक्रिया परीक्षकों का सबसे पसंदीदा विषय (Favorite topic) रहा है। "भ्रूणपोष में कितने क्रोमोजोम होते हैं?" यह वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) 2013, 2014, 2021, और 2023 में बार-बार दोहराया गया है। इसके अतिरिक्त, 2026 में भ्रूणपोष (Endosperm) और परिभ्रूणपोष (Perisperm) की तुलना पर 5 अंकों का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Question) भी पूछा गया है।
  • परागण (Pollination) और उसके अभिकर्मक (Agents): परागण (Pollination) के विभिन्न माध्यमों, विशेष रूप से वायु परागण (Anemophily), जल परागण (Hydrophily), और कीट परागण (Entomophily) से हर साल अनिवार्य रूप से प्रश्न पूछे गए हैं। जल परागण (Hydrophily) पर लघु उत्तरीय प्रश्न 2020 और 2023 में पूछा गया, जबकि इसके उदाहरणों (जैसे- जलकुम्भी, हाइड्रिला) पर 2016 और 2025 में वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) लगातार पूछे गए हैं।
  • फलों के प्रकार और उनके खाने योग्य भाग (Edible parts of fruits): कूट फल (False fruit) की परिभाषा 2013, 2014, और 2018 के लघु उत्तरीय खंड (Short Answer Section) का मुख्य आधार रही है। शरीफा (Custard apple), लीची (Litchi), और सेब (Apple) के खाने योग्य भागों जैसे बीजचोल (Aril) और पुष्पासन (Thalamus) पर 2015, 2016, 2017, और 2021 में लगातार वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) पूछे गए हैं।
  • द्वि-निषेचन (Double Fertilization) की निरंतरता: पुष्पीय पौधों (Flowering plants) में द्वि-निषेचन (Double fertilization) की अवधारणा (Concept) दीर्घ उत्तरीय (5 अंक) और लघु उत्तरीय (2 अंक) दोनों खंडों में अत्यधिक पूछी जाती है। 2017 और 2024 में प्रत्यक्ष रूप से इसी विषय से प्रश्न बनाए गए हैं।
  • सूक्ष्म संरचनाओं (Microstructures) की ओर बदलता रुझान: हाल के वर्षों (2022-2026) के विश्लेषण से पता चलता है कि परीक्षकों ने सतही ज्ञान से हटकर सूक्ष्म संरचनाओं (Microstructures) जैसे कि टेपीटम (Tapetum), लघु बीजाणुधानी (Microsporangium), स्कुटेलम (Scutellum), और स्पोरोपोलिनिन (Sporopollenin) पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।

नीचे दी गई तालिका (Table) पिछले 17 वर्षों में विभिन्न खंडों (Sections) में प्रश्नों के वितरण (Distribution) को दर्शाती है:

परीक्षा वर्ष (Exam Year)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs - Section A)

लघु उत्तरीय (Short Answer - Section B)

दीर्घ उत्तरीय (Long Answer - Section C)

कुल प्रश्न (Total Questions)

2009-2012

4

2

1

7

2013-2014

16

4

2

22

2015-2018

6

2

1

9

2019-2022

12

2

2

16

2023-2026

19

7

2

28

कुल योग (Grand Total)

57

17

8

82

उपर्युक्त डेटा से स्पष्ट है कि 2013-2014 और 2023-2026 के बीच इस अध्याय (Chapter) से प्रश्नों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। अतः 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिए यह अध्याय अत्यधिक अंकदायी (High-scoring) सिद्ध होगा।

Step 2

संभावित वस्तुनिष्ठ प्रश्न - प्रैक्टिस क्विज़ (Predicted MCQs - Practice Quiz)

विगत वर्षों के पैटर्न (PYQ Patterns) के आधार पर 2027 की परीक्षा के लिए 15 सर्वाधिक संभावित वस्तुनिष्ठ प्रश्न। सही विकल्प चुनें और अपनी तैयारी जांचें:

Score: 0 / 15
Q1
भ्रूणपोष में कितने क्रोमोजोम होते हैं? / आवृतबीजी पौधों के भ्रूणपोष में गुणसूत्रों की सूत्रगुणता क्या है?
Q2
इनमें से कौन नर युग्मक से संयोजन कर भ्रूणपोष बनाता है?
Q3
किस फल में बीजचोल (Aril) खाया जाता है?
Q4
निम्न में से किसका पुष्पासन (Thalamus) खाया जाता है?
Q5
परागभित्ति होती है:
Q6
वायु परागित पुष्प सामान्यतः होते हैं:
Q7
निम्न में से किसमें जल परागण (Hydrophily) होता है?
Q8
निम्नलिखित में से किसके द्वारा जलकुम्भी में परागण होता है?
Q9
त्रिसंलयन के पश्चात् भ्रूणकोष की कौन कोशिका प्राथमिक भ्रूणपोष कोशिका बन जाती है?
Q10
निम्नलिखित में से कौन सर्वाधिक ज्ञात प्रतिरोधक कार्बनिक सामग्री में से एक है?
Q11
इमैस्कुलेशन किससे संबंधित है?
Q12
घास के बीज में प्रशल्क (स्कुटेलम) को क्या कहते हैं?
Q13
इंटोमोफिली नामक परागण किसके द्वारा होता है?
Q14
एनिमोफिली नामक परागण किसके द्वारा होता है?
Q15
परागकण मुख्यतः हैं:
Step 3

संभावित लघु उत्तरीय प्रश्न (Predicted Short Answer Questions - 2 Marks)

लघु उत्तरीय प्रश्नों (Short Answer Questions) में परीक्षक सटीक परिभाषा (Definition) और उदाहरण (Examples) की अपेक्षा करते हैं। 2027 परीक्षा के लिए प्रत्येक प्रश्न को अलग कार्ड के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

1. कूट फल के बारे में उदाहरण सहित बताइए।

परिभाषा (Definition): पौधों में फल का निर्माण सामान्यतः केवल अंडाशय (Ovary) से होता है। परंतु जब फल के निर्माण में अंडाशय के साथ-साथ पुष्प के अन्य भाग, जैसे कि पुष्पासन (Thalamus), भी हिस्सा लेते हैं, तो ऐसे फल को कूट फल (False fruit) या आभासी फल कहा जाता है।

कारण (Reason): इनका विकास निषेचित अंडाशय (Fertilized ovary) के अतिरिक्त अन्य पुष्पीय अंगों से होता है।

उदाहरण (Examples): सेब (Apple), नाशपाती (Pear), स्ट्रॉबेरी (Strawberry) और काजू (Cashew)। सेब में जो गुदेदार भाग हम खाते हैं, वह वास्तव में फूला हुआ पुष्पासन (Thalamus) होता है।

2. पुपूर्वता से आप क्या समझते हैं? इसके लाभ बताइए।

परिभाषा (Definition): यह द्विलिंगी पुष्पों (Bisexual flowers) में पाई जाने वाली एक प्राकृतिक अवस्था है जिसमें नर जननांग यानी पुंकेसर (Stamen), मादा जननांग यानी स्त्रीकेसर (Carpel) से पहले परिपक्व (Mature) हो जाते हैं। इस स्थिति को पुपूर्वता (Protandry) कहते हैं।

लाभ (Advantages):

  • स्व-परागण पर रोक: चूँकि दोनों जननांग अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं, इसलिए एक ही फूल में स्व-परागण (Self-pollination) नहीं हो पाता है।
  • पर-परागण को बढ़ावा: यह प्रक्रिया पर-परागण (Cross-pollination) को सुनिश्चित करती है, जिससे पौधों की नई पीढ़ियों में आनुवंशिक विविधता (Genetic diversity) और मजबूत गुण उत्पन्न होते हैं।

उदाहरण (Example): सूर्यमुखी (Sunflower) और कपास (Cotton)।

3. जलपरागण से आप क्या समझते हैं? सोदाहरण बताएँ।

परिभाषा (Definition): पुष्पीय पौधों में परागकणों (Pollen grains) का परागकोश (Anther) से वर्तिकाग्र (Stigma) तक जल (Water) के माध्यम से स्थानांतरित होने की प्रक्रिया को जलपरागण (Hydrophily) कहते हैं।

अनुकूलन (Adaptations): जल परागित पौधों के परागकण हल्के होते हैं। पानी में सड़ने से बचने के लिए इनके चारों ओर श्लेष्म (Mucilage) का एक सुरक्षात्मक आवरण होता है।

उदाहरण (Examples): हाइड्रिला (Hydrilla), वैलिसनेरिया (Vallisneria), और समुद्री घास जैसे जोस्टेरा (Zostera)।

4. स्व-युग्मन (ऑटोगेमी) क्या है? इसके लिए कौन अनुकूलन पुष्प में होते हैं?

परिभाषा (Definition): जब एक ही पुष्प के परागकोश (Anther) से परागकण (Pollen grains) उसी पुष्प के वर्तिकाग्र (Stigma) पर स्थानांतरित होते हैं, तो इसे स्व-युग्मन (Autogamy) कहा जाता है। यह स्व-परागण (Self-pollination) का ही एक प्रकार है।

पुष्प में अनुकूलन (Adaptations in flower):

  • समकालपक्वता (Homogamy): पुष्प के परागकोश और वर्तिकाग्र दोनों एक ही समय पर परिपक्व (Mature) होते हैं ताकि परागण आसानी से हो सके।
  • अनुन्मील्य परागण (Cleistogamy): कुछ पौधों के पुष्प कभी नहीं खिलते और हमेशा बंद अवस्था में रहते हैं। बंद होने के कारण इनमें केवल स्व-परागण ही संभव हो पाता है (उदाहरण: कोमेलिना/Commelina और वायोला/Viola)।

5. विपुंसन क्या है?

परिभाषा (Definition): कृत्रिम संकरण (Artificial hybridization) के कार्यक्रमों में, जब किसी द्विलिंगी पुष्प (Bisexual flower) की कली (Bud) के खिलने से पहले ही चिमटी (Forceps) की सहायता से उसके परागकोशों (Anthers) को काटकर हटा दिया जाता है, तो इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को विपुंसन (Emasculation) कहते हैं।

उद्देश्य (Purpose): इसका मुख्य उद्देश्य पुष्प के वर्तिकाग्र (Stigma) को उसके ही अवांछित परागकणों (Unwanted pollen grains) द्वारा स्व-परागित (Self-pollinated) होने से बचाना है, ताकि इच्छित (Desired) परागकणों का ही उपयोग किया जा सके।

6. झिल्ली एवं बीजावरण में कोई दो अन्तर लिखें।

झिल्ली (Integument) बीजावरण (Testa)
यह बीजाण्ड (Ovule) का सबसे बाहरी सुरक्षात्मक आवरण (Covering) होता है। यह परिपक्व बीज (Seed) का सबसे बाहरी कठोर आवरण होता है।
यह निषेचन (Fertilization) से पूर्व की एक जीवित संरचना है। निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड की झिल्ली (Integument) ही सूखकर और कठोर होकर बीजावरण (Testa) में बदल जाती है। यह एक मृत (Dead) संरचना है।

7. भ्रूणकोष की घटक कोशिकाओं के नाम क्या हैं?

एक परिपक्व आवृतबीजी (Angiospermic) भ्रूणकोष (Embryo sac) 7-कोशिकीय (7-celled) और 8-केन्द्रकीय (8-nucleate) होता है। इसके मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:

  • अंड-समुच्चय (Egg Apparatus): यह बीजांड द्वार (Micropylar end) की ओर स्थित होता है। इसमें एक अंड कोशिका (Egg cell) और दो सहाय कोशिकाएँ (Synergids) होती हैं।
  • प्रतिव्यासांत कोशिकाएँ (Antipodal cells): निभाग (Chalazal end) की ओर स्थित तीन कोशिकाएँ होती हैं।
  • केंद्रीय कोशिका (Central cell): भ्रूणकोष के बिल्कुल मध्य में यह सबसे बड़ी कोशिका होती है जिसमें दो ध्रुवीय केन्द्रक (Polar nuclei) उपस्थित होते हैं।
Step 4

संभावित दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Predicted Long Answer Questions - 5 Marks)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों (Long Answer Questions) में 5 अंक प्राप्त करने के लिए प्रत्येक प्रश्न का व्यवस्थित मॉडल उत्तर अलग कार्ड में दिया गया है:

1. दोहरा निषेचन से आप क्या समझते हैं? आरेखित चित्रों की मदद से समझाएँ।

आदर्श उत्तर (Model Answer)

परिचय (Introduction): आवृतबीजी पादपों (Angiosperms) में निषेचन (Fertilization) की एक अत्यंत अद्वितीय (Unique) प्रक्रिया पाई जाती है। इस प्रक्रिया में एक ही भ्रूणकोष (Embryo sac) के भीतर दो अलग-अलग प्रकार के संलयन (Fusion) एक साथ होते हैं। इसी घटना को दोहरा निषेचन (Double Fertilization) कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम वैज्ञानिक नवाश्चिन (Nawaschin) ने 1898 में फ्रिटिलेरिया (Fritillaria) और लिलियम (Lilium) पौधों में की थी。

दोहरे निषेचन की प्रक्रिया (Process of Double Fertilization): परागकण के अंकुरण के बाद पराग नलिका (Pollen tube) बीजांड (Ovule) में प्रवेश करती है। यह नलिका भ्रूणकोष (Embryo sac) के अंदर फटकर दो नर युग्मक (Male gametes) मुक्त करती है। इसके बाद निम्नलिखित दो संलयन होते हैं:

  1. सत्य निषेचन या युग्मक संलयन (Syngamy / True Fertilization): पहला नर युग्मक (जो अगुणित - n होता है) भ्रूणकोष की अंड कोशिका (Egg cell - n) के साथ संलयन करता है। इसके परिणामस्वरूप एक द्विगुणित (Diploid - 2n) युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है। भविष्य में यही युग्मनज विकसित होकर बीज के अंदर भ्रूण (Embryo) बनता है।
    सूत्र (Formula): नर युग्मक (n) + अंड कोशिका (n) → युग्मनज (Zygote - 2n)
  2. त्रिसंलयन (Triple Fusion): दूसरा नर युग्मक (n) भ्रूणकोष के केंद्र में स्थित बड़ी केंद्रीय कोशिका के द्वितीयक केन्द्रक (Secondary nucleus - 2n) के पास पहुँचता है और उसके साथ संलयन करता है। इसके परिणामस्वरूप एक त्रिगुणित (Triploid - 3n) प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (Primary Endosperm Nucleus - PEN) का निर्माण होता है। चूंकि इस संलयन में तीन अगुणित केन्द्रक (एक नर युग्मक और दो ध्रुवीय केन्द्रक) शामिल होते हैं, इसलिए इसे त्रिसंलयन कहते हैं।
    सूत्र (Formula): नर युग्मक (n) + द्वितीयक केन्द्रक (2n) → प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (3n)

दोहरा निषेचन (Double Fertilization) का अर्थ: चूंकि उपर्युक्त दोनों संलयन (युग्मक संलयन और त्रिसंलयन) एक ही भ्रूणकोष (Embryo sac) में एक साथ संपन्न होते हैं, इसलिए इस संपूर्ण घटना को 'दोहरा निषेचन' (Double Fertilization) कहा जाता है。

जैविक महत्व (Biological Significance):

  1. त्रिसंलयन के फलस्वरूप भ्रूणपोष (Endosperm) का निर्माण होता है, जो विकासशील भ्रूण (Developing embryo) को भरपूर पोषण (Nutrition) प्रदान करता है।
  2. यह केवल आवृतबीजी (Angiospermic) पौधों का एक विशिष्ट और मुख्य लक्षण (Characteristic feature) है, जो अन्य पौधों में नहीं पाया जाता।
💡 परीक्षा टिप: यहाँ बोर्ड परीक्षा में पराग नलिका का बीजांड में प्रवेश और भ्रूणकोष के अंदर दोनों नर युग्मकों के संलयन को दर्शाने वाला एक स्वच्छ एवं नामांकित आरेख (Labelled Diagram) अवश्य बनाएं।

2. बीज से आप क्या समझते हैं? किसी एक बीज की निर्माण प्रक्रिया का वर्णन करें।

आदर्श उत्तर (Model Answer)

परिचय (Introduction): पुष्पीय पौधों (Flowering plants) में लैंगिक जनन (Sexual reproduction) के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में बीज (Seed) का निर्माण होता है। वनस्पति विज्ञान (Botany) की भाषा में, निषेचन (Fertilization) के पश्चात् परिपक्व (Mature) हुए बीजाण्ड (Ovule) को ही बीज (Seed) कहा जाता है। एक सामान्य बीज में मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं: बीज आवरण (Seed coat), बीजपत्र (Cotyledons) और एक भ्रूणीय अक्ष (Embryonal axis)।

बीज के निर्माण की प्रक्रिया (Process of Seed Formation): दोहरे निषेचन (Double Fertilization) के तुरंत बाद, पुष्प के बीजाण्ड (Ovule) के अंदर कई जटिल रासायनिक और शारीरिक परिवर्तन होते हैं जो अंततः उसे बीज में बदल देते हैं। यह प्रक्रिया निम्न मुख्य चरणों में पूरी होती है:

  1. भ्रूण का विकास (Embryogeny): द्विगुणित युग्मनज (Diploid Zygote) कुछ समय तक विश्राम करता है और फिर समसूत्री विभाजन (Mitosis) द्वारा विभाजित होना शुरू करता है। यह पहले प्राकभ्रूण (Proembryo), फिर हृदयाकार (Heart-shaped) और परिपक्व भ्रूण (Mature Embryo) में बदल जाता है।
  2. भ्रूणपोष का विकास (Development of Endosperm): त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष कोशिका विभाजित होकर भ्रूणपोष (Endosperm) बनाती है, जो भ्रूण के विकास के लिए भरपूर खाद्य सामग्री संचित करता है।
  3. आवरणों में परिवर्तन (Changes in Integuments): बीजाण्ड की झिल्लियां (Integuments) सूखकर सख्त हो जाती हैं और बीज आवरण (Seed coat) बनाती हैं (बाहरी झिल्ली → Testa, भीतरी झिल्ली → Tegmen)।
  4. नमी का ह्रास और प्रसुप्ति (Dehydration and Dormancy): जैसे-जैसे बीज परिपक्व होता है, उसके अंदर जल की मात्रा 10-15% तक रह जाती है। भ्रूण एक निष्क्रिय अवस्था (Dormancy) में चला जाता है जो अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर अंकुरित होता है।

बीज का महत्व (Significance of Seed): बीज पौधों को भौगोलिक रूप से फैलाने में मदद करते हैं और कठोर आवरण भ्रूण को कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों में सुरक्षित रखता है।

3. भ्रूणपोष एवं परिभ्रूणपोष की तुलना करें। भ्रूणपोष के विकास का वर्णन करें।

भाग A: भ्रूणपोष (Endosperm) एवं परिभ्रूणपोष (Perisperm) में तुलना (Comparison Table)

भ्रूणपोष (Endosperm) परिभ्रूणपोष (Perisperm)
उत्पत्ति: यह दोहरे निषेचन के दौरान त्रिसंलयन (Triple fusion) के परिणामस्वरूप बनता है। यह निषेचन के बाद की संरचना है। उत्पत्ति: यह निषेचन से पहले की संरचना है; बीजाण्ड (Ovule) के बीजांडकाय (Nucellus) का बचा हुआ (Remnant) भाग है।
सूत्रगुणता (Ploidy): आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में यह सदैव त्रिगुणित (Triploid - 3n) होता है। सूत्रगुणता (Ploidy): बीजांडकाय का हिस्सा होने के कारण यह हमेशा द्विगुणित (Diploid - 2n) होता है।
उपस्थिति (Occurrence): यह लगभग सभी बीजों के विकासशील चरण में (और मक्का, गेहूँ जैसे बीजों में) उपस्थित होता है। उपस्थिति (Occurrence): यह केवल कुछ विशिष्ट बीजों में ही पाया जाता है (जैसे- काली मिर्च/Black pepper, चुकंदर/Beetroot)।
मुख्य कार्य (Function): यह विकासशील भ्रूण (Embryo) को सीधा पोषण (Nutrition) और भोजन प्रदान करता है। मुख्य कार्य (Function): यह मुख्य रूप से भ्रूणपोष को पोषण देता है या बीज में अतिरिक्त संचित भोजन के रूप में मौजूद रहता है।

भाग B: भ्रूणपोष का विकास (Development of Endosperm)

विकास की प्रक्रिया और कोशिका भित्ति के निर्माण के आधार पर इसे 3 प्रकारों में बाँटा गया है:

  1. केन्द्रकीय भ्रूणपोष (Nuclear Endosperm): इसमें प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक सूत्री विभाजन करता है लेकिन तुरंत कोशिका भित्ति नहीं बनती। उदाहरण: कच्चे नारियल का पानी।
  2. कोशिकीय भ्रूणपोष (Cellular Endosperm): इसमें हर विभाजन के तुरंत बाद कोशिका भित्ति का निर्माण होता है। उदाहरण: धतूरा, पेटूनिया, नारियल का सफेद गूदा।
  3. हेलोबियल भ्रूणपोष (Helobial Endosperm): यह केन्द्रकीय और कोशिकीय भ्रूणपोष के बीच की मध्यवर्ती अवस्था है। उदाहरण: एकबीजपत्री पौधों के हेलोबियल क्रम में।
Step 5

पैटर्न बदलने पर बैकअप प्रश्न (Backup Questions in case of pattern change)

💡 पैटर्न परिवर्तन चेतावनी: पैटर्न विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि अध्याय 2 के कुछ ऐसे हिस्से (Dead Sections) हैं जिनसे 2009 से 2021 तक कोई विशेष प्रश्न नहीं पूछे गए, लेकिन 2024 और 2026 में परीक्षकों ने अचानक यहाँ से प्रश्न उठाए हैं। यदि 2027 में परीक्षक पैटर्न बदलते हैं, तो निम्नलिखित बैकअप प्रश्न अत्यधिक संभावित हैं:

1. टेपीटम क्या है? इसके मुख्य कार्य लिखें।

परिभाषा (Definition): एक परिपक्व परागकोश (Anther) के अंदर मौजूद लघु बीजाणुधानी (Microsporangium) की सबसे भीतरी परत (Innermost layer) को टेपीटम (Tapetum) कहते हैं। इसकी कोशिकाएं काफी बड़ी, सघन जीवद्रव्य वाली और प्रायः एक से अधिक केन्द्रक (Multinucleate) वाली होती हैं।

प्रमुख कार्य (Major Functions):

  1. पोषण (Nutrition): इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य अंदर विकसित हो रहे लघु बीजाणुओं या परागकणों को भरपूर पोषण प्रदान करना है।
  2. बाह्यचोल का निर्माण: यह परागकणों के बाहरी कठोर आवरण (Exine) के निर्माण के लिए स्पोरोपोलिनिन (Sporopollenin) का स्राव करती है।
  3. एंजाइम का स्राव: यह कैलोज आवरण को घोलने के लिए कैलेज (Callase) नामक एंजाइम का स्राव करती है।

2. असंगजनन (Apomixis) क्या है और कृषि में इसका क्या महत्व है?

परिभाषा (Definition): पौधों में जनन की वह प्रक्रिया जिसमें युग्मकों के संलयन या निषेचन (Fertilization) के बिना ही सीधे बीज का निर्माण हो जाता है, उसे असंगजनन (Apomixis) कहते हैं। यह अलैंगिक जनन का एक प्रकार है जो लैंगिक जनन की नकल करता है।

उदाहरण: एस्ट्रेसिया (Asteraceae) परिवार के पौधे और विभिन्न प्रकार की घास (Grasses)।

कृषि में महत्व (Importance in Agriculture):

  1. क्लोन का निर्माण: असंगजनन द्वारा उत्पादित बीजों से उगे पौधों में आनुवंशिक भिन्नता नहीं होती। वे मातृ पौधे के बिल्कुल आनुवंशिक क्लोन होते हैं।
  2. किसानों के लिए आर्थिक लाभ: संकर बीजों को असंगजनन द्वारा विकसित करने पर बीज के गुण अगली पीढ़ियों में अलग नहीं होंगे, जिससे किसानों को हर साल महंगे संकर बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

3. बीजाण्ड (Ovule) के किन्हीं दो प्रमुख प्रकारों का वर्णन करें।

पौधों में बीजाण्ड (Ovule) की संरचना और उसके बीजांड वृंत (Funicle) से जुड़ने के कोण (Angle) के आधार पर दो सबसे महत्वपूर्ण प्रकारों का तुलनात्मक विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

ऑर्थोट्रॉपस (Orthotropous) बीजाण्ड एनाट्रॉपस (Anatropous) बीजाण्ड
इसे ऋजु बीजाण्ड भी कहते हैं। यह प्रकृति में सबसे सीधा (Upright) बीजाण्ड होता है। इसे प्रतीप बीजाण्ड भी कहते हैं। यह आवृतबीजी पौधों में 80% से अधिक पाया जाने वाला सबसे आम प्रकार का बीजाण्ड है।
इसमें बीजांड द्वार (Micropyle), निभाग (Chalaza) और बीजांड वृंत (Funicle) तीनों बिल्कुल एक ही सीधी ऊर्ध्वाधर रेखा में स्थित होते हैं। इसमें बीजाण्ड वृद्धि के दौरान पूरी तरह से 180 डिग्री पर उल्टा (Inverted) हो जाता है। इस घुमाव के कारण बीजांड द्वार नीचे की ओर आकर बीजांड वृंत के समीप आ जाता है।
उदाहरण: पॉलीगोनम (Polygonum) और पान। उदाहरण: मटर (Pisum sativum) और चना।