अध्याय 8.4: कैंसर (Cancer) [BSEB 2015, 2019, 2021, 2024] - परीक्षा उपयोगी नोट्स
कैंसर मानव की सबसे भयंकर बीमारियों में से एक है और पूरी दुनिया (साथ ही भारत में भी) में मृत्यु का एक बहुत बड़ा कारण है।
कैंसर कोशिका का जीवविज्ञान (Cancer Cell Biology)
हमारे शरीर की सामान्य कोशिकाओं की वृद्धि और विकास पूरी तरह से नियंत्रित और नियमित होता है, जबकि कैंसर में यह नियंत्रण खत्म हो जाता है।
संस्पर्श संदमन (Contact Inhibition): यह सामान्य कोशिकाओं का एक विशेष गुण है। जब सामान्य कोशिकाएं दूसरी कोशिकाओं के संपर्क (टच) में आती हैं, तो उनका बढ़ना (वृद्धि) रुक जाता है।
कैंसर में क्या होता है?: कैंसर कोशिकाओं में 'संस्पर्श संदमन' का गुण खत्म हो जाता है। इसके कारण ये कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से लगातार विभाजित होती रहती हैं और कोशिकाओं का एक गुच्छा बना लेती हैं, जिसे अर्बुद (Tumor) कहते हैं।
अर्बुद (Tumor) के प्रकार
कैंसर कोशिकाओं के गुच्छे (ट्यूमर) मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
सुदम अर्बुद (Benign Tumor): ये ट्यूमर सामान्यतः अपने पैदा होने वाले स्थान तक ही सीमित रहते हैं। ये शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते हैं और इनसे शरीर को बहुत कम नुकसान होता है। इनकी वृद्धि काफी धीमी होती है।
दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumor): ये बहुत ही खतरनाक कैंसर कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें नवद्रव्यीय (Neoplastic) कोशिकाएं भी कहते हैं। ये बहुत तेजी से बढ़ती हैं, आस-पास के स्वस्थ ऊतकों पर हमला करके उन्हें नष्ट करती हैं, और सामान्य कोशिकाओं का भोजन छीनकर उन्हें भूखा मार देती हैं।
मेटास्टेसिस (Metastasis): यह कैंसर का सबसे डरावना और घातक गुण है। इसमें दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumor) की कोशिकाएं टूटकर खून या लसीका के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुँच जाती हैं और वहाँ नया ट्यूमर बनाना शुरू कर देती हैं।
कैंसर के कारण (कैंसरजन / Carcinogens)
सामान्य कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदलने वाले कारकों को कैंसरजन (Carcinogens) कहते हैं। ये मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
- भौतिक कारक: एक्स-किरणें (X-rays), गामा किरणें और पराबैंगनी (UV) किरणें जैसे विकिरण जो सीधे हमारे DNA को नुकसान पहुँचाकर कैंसर पैदा करते हैं।
- रासायनिक कारक: तंबाकू के धुएं में मौजूद रसायन (जो फेफड़े के कैंसर का मुख्य कारण हैं) और मस्टर्ड गैस आदि।
- जैविक कारक [BSEB 2015, 2016, 2017, 2021]: कैंसर पैदा करने वाले वायरसों को अर्बुदीय विषाणु (Oncogenic viruses) कहते हैं। इनके अंदर मौजूद कैंसरकारी जीनों को 'विषाणुवीय अर्बुदजीन' (Viral oncogenes) कहा जाता है।
(नोट: हमारे शरीर में कुछ सामान्य जीन 'Proto-oncogenes' भी होते हैं, जो किसी विशेष परिस्थिति में सक्रिय होकर कैंसर का कारण बन सकते हैं।)
कैंसर की पहचान और जाँच (Diagnosis)
कैंसर का शुरुआत में ही पता लगाना इसके सफल इलाज के लिए बहुत जरूरी है। इसकी जाँच के मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:
- बायोप्सी (Biopsy): इसमें ट्यूमर वाले हिस्से से ऊतक (tissue) का एक छोटा सा टुकड़ा लेकर उसे सूक्ष्मदर्शी (Microscope) से जाँचा जाता है।
- रक्त और अस्थिमज्जा परीक्षण: इसमें खून की कोशिकाओं की गिनती की जाँच की जाती है (खासकर ब्लड कैंसर या ल्यूकेमिया का पता लगाने के लिए)।
- रेडियोग्राफी (Radiography): एक्स-किरणों (X-rays) का उपयोग करके शरीर के अंगों की जाँच करना।
- सीटी स्कैन (CT Scan): यह एक्स-किरणों का उपयोग करके शरीर के अंदरूनी अंगों की 3D (त्रिविम) तस्वीर बनाता है।
- एमआरआई (MRI): यह बहुत तेज चुंबकीय क्षेत्र और विकिरण का उपयोग करके शरीर के जीवित ऊतकों में होने वाले बदलावों का एकदम सटीक पता लगाता है।
कैंसर का उपचार (Treatment)
कैंसर के इलाज के लिए आमतौर पर निम्नलिखित तरीके अपनाए जाते हैं (अक्सर इनका एक साथ उपयोग किया जाता है):
- सर्जरी (Surgery): ऑपरेशन के द्वारा ट्यूमर को काटकर शरीर से बाहर निकाल देना।
- रेडियोथेरेपी (Radiotherapy): इसमें उच्च विकिरण (Radiation) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को जलाकर नष्ट किया जाता है, जबकि आस-पास की स्वस्थ कोशिकाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है।
- कीमोथेरेपी (Chemotherapy): कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए खास रासायनिक दवाइयों का उपयोग किया जाता है। इसके दुष्प्रभाव (Side effects) भी होते हैं, जैसे- मरीजों के बाल झड़ जाना और खून की कमी (एनीमिया) होना।
- इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): कैंसर कोशिकाएं हमारे प्रतिरक्षा तंत्र से छिपने में माहिर होती हैं। इसलिए मरीज को 'अल्फा-इंटरफेरॉन' (Alpha-Interferon) जैसे पदार्थ दिए जाते हैं। ये पदार्थ प्रतिरक्षा तंत्र को बहुत अधिक सक्रिय कर देते हैं ताकि वह खुद ट्यूमर को नष्ट कर सके।