अध्याय 8.3: एड्स (AIDS) [BSEB 2012, 2018] - परीक्षा उपयोगी नोट्स

एड्स का परिचय और अर्थ

पूरा नाम: एड्स (AIDS) का पूरा नाम 'उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता संलक्षण' (Acquired Immunodeficiency Syndrome) है।

अर्थ: इसका सीधा मतलब है हमारे प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) का कमजोर हो जाना। यह कोई जन्मजात बीमारी नहीं है, बल्कि व्यक्ति अपने जीवनकाल में इसे उपार्जित (Acquired) करता है।

इतिहास: एड्स का पहला मामला दुनिया में 1981 में सामने आया था और आज यह एक वैश्विक महामारी बन चुका है।

रोगजनक (Pathogen) और विषाणु की प्रकृति [BSEB 2018, 2019, 2020, 2022, 2023, 2026]

एड्स एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है जो HIV (Human Immunodeficiency Virus) नामक वायरस के कारण होती है।

HIV एक विशेष प्रकार के वायरसों के समूह में आता है जिसे पश्चविषाणु (Retrovirus) कहते हैं।

इस वायरस के अंदर आनुवंशिक पदार्थ के रूप में RNA होता है, जो एक प्रोटीन के आवरण (कवर) से ढका रहता है।

फैलने के कारण (Modes of Transmission) [BSEB 2021]

HIV का संक्रमण मुख्य रूप से निम्नलिखित चार कारणों से फैलता है:

विशेष ध्यान दें: HIV केवल छूने, साथ बैठकर खाने या सामान्य शारीरिक संपर्क से नहीं फैलता है। यह केवल शरीर के तरल पदार्थों (Body fluids) के आदान-प्रदान से ही फैलता है।

HIV के काम करने का तरीका (विषाणु का जीवन चक्र)

जब HIV शरीर में प्रवेश करता है, तो यह 7 चरणों में प्रतिरक्षा तंत्र को नष्ट करता है:

बंधन (Binding) [BSEB 2010, 2016, 2021, 2024]: सबसे पहले HIV वायरस का प्रोटीन (gp120), मानव की प्रतिरक्षा कोशिकाओं (बृहत्भक्षकाणु और T-लसीकाणु) की सतह पर मौजूद CD4 रिसेप्टर से जुड़ जाता है।

संलयन (Fusion): वायरस का बाहरी आवरण कोशिका की झिल्ली से मिल जाता है और वह अपना RNA कोशिका के अंदर छोड़ देता है।

विलोम प्रतिलेखन (Reverse Transcription) [BSEB 2026]: कोशिका के अंदर, वायरस का RNA 'रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज' एंजाइम की मदद से अपना रूप बदलकर विषाणवीय DNA (Viral DNA) बन जाता है।

समावेशन (Integration): अब यह नया बना Viral DNA 'इंटेग्रेज' एंजाइम की मदद से मानव कोशिका के मुख्य DNA के साथ जाकर जुड़ जाता है।

प्रतिकृति (Replication): अब संक्रमित कोशिका पूरी तरह से वायरस के नियंत्रण में आ जाती है और नए वायरल RNA और प्रोटीन बनाने लगती है। इस दौरान मैक्रोफेज (Macrophages) कोशिकाएं लगातार वायरस बनाती रहती हैं और एक 'HIV फैक्टरी' की तरह काम करती हैं।

संयोजन और मुकुलन (Assembly and Budding): नए वायरस कोशिका की सतह पर जमा होते हैं और 'प्रोटीएज' एंजाइम उन्हें पूरी तरह से संक्रामक वायरस में बदल देता है।

प्रतिरक्षा तंत्र का नष्ट होना (Immune System Collapse)

HIV वायरस मुख्य रूप से सहायक टी-लसीकाणुओं (T-helper cells) के अंदर घुसकर अपना चक्र दोहराता है। जब नए वायरस कोशिका से बाहर निकलते हैं, तो वे T-कोशिका को फाड़कर नष्ट कर देते हैं।

बार-बार ऐसा होने से खून में T-कोशिकाओं की संख्या बहुत तेजी से गिर जाती है। इस दौरान मरीज को बार-बार बुखार, दस्त और लगातार वजन घटने की समस्या होती है।

अंत में, मरीज का प्रतिरक्षा तंत्र इतना कमजोर हो जाता है कि वह सामान्य बैक्टीरिया (जैसे- माइकोबैक्टीरियम), परजीवी (टॉक्सोप्लाज्मा) और कवक (Fungi) से होने वाली छोटी बीमारियों से भी खुद को नहीं बचा पाता है।

निदान (Diagnosis) और उपचार (Treatment)

निदान (टेस्ट): एड्स की बीमारी का पता लगाने के लिए सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले ब्लड टेस्ट का नाम एलीसा (ELISA) है।

उपचार: इसके इलाज के लिए ART (Anti-retroviral therapy) नामक दवाइयां दी जाती हैं। ये दवाइयां मरीज के जीवनकाल को बढ़ा सकती हैं, लेकिन इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकतीं।

रोकथाम और जन-जागरूकता (Prevention)

एड्स से बचने का सबसे अच्छा उपाय बचाव ही है, इसलिए कहा जाता है- "अज्ञानता के कारण मत मरो" (Don't die of ignorance)।

भारत में NACO (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) और अन्य NGO लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं।

(अतिरिक्त जानकारी: 2019 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में लगभग 1.34 लाख लोग HIV से पीड़ित हैं। इसलिए सुरक्षित यौन संबंध, डिस्पोजेबल सुइयों का उपयोग, सुरक्षित ब्लड बैंक और माँ से बच्चे में संक्रमण रोकने (PMTCT) की अत्यधिक आवश्यकता है।)